विवादित बयान देने वाले नेताओं पर तुरंत कार्यवाही ना करने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा, क्या आप शक्तिहीन हैं?
लोकसभा चुनाव में सभी पार्टियां वोटरों को लुभाने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में जनसभाएं कर रही हैं। मगर इस जनसभा के दौरान सभी पार्टी के कुछ नेता अभद्र और विवादित बयान देकर मुश्किल में फंसते नजर आते हैं। इस कड़ी में भारतीय जनता पार्टी की नेता और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ,बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान का नाम सबसे आगे है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर इन विवादित बयान देने वाले नेताओं पर तुरंत एक्शन ना ले जाने के कारण चुनाव आयोग से पूछा है कि क्या आप शक्तिहीन है।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट एक एनआरआई राइट टीचर मनसुखानी की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें यह कहा गया था कि चुनाव के दौरान अभद्र भाषा और विवादित बयान देने वाले नेताओं पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से पूछा कि विवादित बयान देने वाले मायावती, योगी आदित्यनाथ पर चुनाव आयोग ने अब तक क्या कार्यवाही की है।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की बेंच को आयोग के वकील ने जवाब देते हुए कहा कि इस मामले में हमारे अधिकार बहुत सीमित हैं। हम प्रत्याशियों को नोटिस भेजकर जवाब मांग सकते हैं। हम उन्हें किसी भी तरह से उम्मीदवारी के लिए अमान्य घोषित करके बाहर नहीं कर सकते। इस मामले में हमारे अधिकार बहुत ही सीमित हैं। इस पर तीनों जजों की बेंच ने आयोग के वकील को जवाब देते हुए कहा कि क्या आप वास्तव में यह कहना चाहते हैं कि आप शक्तिहीन हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग के प्रतिनिधि को कोर्ट में पेश होने की आदेश दिया है। ताकि आयोग के इस अधिकार की समीक्षा की जाएगी कि क्या हेट स्पीच देने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकार सीमित हैं।
इसके बाद ही आयोग ने विवादित बयान देने वाले नेताओं पर कार्यवाही करते हुए उनके चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी थी। जिसमें से आजम खान और योगी आदित्यनाथ पर 3 दिन जबकि मायावती और मेनका गांधी पर दो 2 दिन के चुनाव प्रचार पर रोक लगी है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



